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ईरान-अमेरिका तनाव में चीन की एंट्री, होर्मुज पर नाकेबंदी को लेकर अमेरिका को दी कड़ी चेतावनी

 Published : Apr 14, 2026 11:52 pm IST,  Updated : Apr 14, 2026 11:52 pm IST

चीन ने चेतावनी देते हुए ये समझा दिया है कि किसी भी देश के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों में वह किसी तीसरे देश की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं करेगा।

China- India TV Hindi
चीन ने अमेरिका को दिखाई आंखें Image Source : AP/PTI

बीजिंग: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब चीन की एंट्री से वैश्विक चिंता और बढ़ गई है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ की नाकेबंदी को लेकर चीन ने पहली बार अमेरिका को सख्त चेतावनी दी है। चीन ने साफ कहा है कि ईरान के साथ उसके संबंध बेहद अहम हैं और दोनों देशों के बीच मजबूत कारोबारी रिश्ते हैं। चीन ने चेतावनी दी कि अगर किसी तीसरे देश ने इन संबंधों में दखल देने की कोशिश की, तो उसके गंभीर परिणाम होंगे।

चीन के रक्षा मंत्री ने कही ये बात

चीन के रक्षा मंत्री डॉन्ग जुन ने कहा, "चीन किसी भी देश के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों में तीसरे देश की दादागीरी बर्दाश्त नहीं करेगा।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ चीन के लिए खुला रहना चाहिए और अगर कोई इसमें बाधा डालता है, तो चीन उचित कार्रवाई करेगा। चीन के विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिका के रवैये को गैर-जिम्मेदाराना बताया। मंत्रालय के अनुसार, होर्मुज़ की अमेरिकी नाकेबंदी बेहद खतरनाक है और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

ईरान को हथियारों के निर्यात के मुद्दे पर भी चीन ने साफ कर दिया है कि वह किसी तीसरे देश के दबाव में नहीं आएगा और अपने समझौतों का पालन करेगा। दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी थी कि अगर चीन ईरान को हथियार देता है, तो उस पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। अमेरिकी चेतावनी के जवाब में चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने बगैर किसी देश का नाम लिए एक नया आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत अगर कोई देश अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए चीन के हितों, संप्रभुता, सुरक्षा या विकास में दखल देता है, तो चीन कड़ा जवाबी कदम उठाएगा।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी बिना अमेरिका का नाम लिए कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि चीन झुकने वाला देश नहीं है और सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करना चाहिए।

UAE को भी दिया सख्त संदेश

अमेरिका के अलावा चीन ने संयुक्त अरब अमीरात को भी स्पष्ट संदेश दिया है। अबू धाबी के क्राउन प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान इन दिनों चीन के दौरे पर हैं। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक के दौरान क्राउन प्रिंस ने चीन-ईरान संबंधों पर आपत्ति जताई। इस पर जिनपिंग ने कहा कि UAE चीन का दोस्त है, लेकिन वह चीन के अन्य देशों के साथ संबंधों को तय नहीं कर सकता। बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि मिडिल ईस्ट में शांति पूरी दुनिया के लिए जरूरी है और इसके लिए सभी देशों को एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। 

जिनपिंग ने अमेरिका को भी अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने और विकास व सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की सलाह दी। जिनपिंग ने खाड़ी देशों को भी सुझाव दिया कि वे ईरान के साथ अपने संबंध सुधारें। उन्होंने बताया कि UAE मिडिल ईस्ट में चीन का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और अरब देशों के साथ चीन का सालाना व्यापार करीब 400 अरब डॉलर का है। चीन की अर्थव्यवस्था के लिए सऊदी अरब, ईरान और UAE से तेल की आपूर्ति बेहद महत्वपूर्ण है, जबकि कतर से LNG और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की सप्लाई भी अहम भूमिका निभाती है। इसी वजह से चीन मिडिल ईस्ट में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है और अमेरिका के प्रभाव को कम करने की दिशा में काम कर रहा है। इस रणनीति में उसे रूस का भी समर्थन मिल रहा है।

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